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अवधारणा

चिति सम्वाद: साहित्य और कलाओं में चिति विमर्श विषय पर आयोजित द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मूल उद्देश्य साहित्य, कला और लोक-जनजातीय परंपराओं में चिति (सामूहिक चेतना) की अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण, ज्ञान के हस्तांतरण एवं समाजीकरण की प्रक्रिया तथा चिति में समयानुसार हुए परिवर्तनों और उनके सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण कर समाज के विकास में उनकी भूमिका को समझना है। ‘चिति’ का अर्थ है चेतना। सुप्रसिद्ध विद्वान् डॉ. कृष्णदत्त पालीवाल ‘चिति’ को अंग्रेजी के साइकी (Psyche)या मानस को इसका समानार्थी मानते हैं। साधारण भाषा में चिति को राष्ट्र की सामूहिक चेतना (Collective Consciousness of the Nation)के रूप में समझ सकते हैं। ‘चिति’ भौतिक या स्थूल चेतना से भिन्न स्तर की अवस्था है। इसका विकास सहस्राब्दियों में होता है। जीवन के अनुभव, अगणित अनुसन्धान और अनुकूलन की प्रक्रिया से संचरण के उपरांत ही किसी समाज या मानव समुदाय की 'चिति' का विकास होता है। उसे अनुभव होता रहता है कि जो कुछ अब तक प्राप्त हुआ है उससे भी बड़ा और महत्वपूर्ण कोई पदार्थ है जिसकी उसे खोज है। वह महत्वपूर्ण पदार्थ क्या है और उसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है? इसके लिए निरंतर प्रयास किया गया होगा। उन प्रयासों ने मानवीय चेतना को जिस उच्चतर स्थिति में प्रतिष्ठित किया, चेतना का यही रूप ‘चिति’ के नाम से अभिहित है।

 

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय :

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ, उत्तर प्रदेश अधिनियम 2008 के तहत स्थापित एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है, जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा मान्यता प्राप्त है। यह विश्वविद्यालय महायान थेरवाद वज्रयान बौद्ध धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्ट के तत्त्वावधान में संचालित है, जिसने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसे NAAC के द्वारा इसे ‘A’ ग्रेड प्रदान किया गया है। विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर ‘सुभारतीपुरम’ के नाम से जाना जाता है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निकट, दिल्ली बाईपास रोड पर स्थित है। लगभग 250 एकड़ में फैला यह परिसर भव्य भवनों, हरे-भरे उपवनों और उत्कृष्ट खेल सुविधाओं से सुसज्जित है।यहाँ मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, विधि, शिक्षा, पत्रकारिता, कला एवं विज्ञान सहित अनेक विषयों में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले संघटक महाविद्यालय हैं। विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रम भी संचालित होते हैं, जिन्हें UGC की मान्यता प्राप्त है। शिक्षा, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्रीयता के प्रति समर्पित यह विश्वविद्यालय प्रतिष्ठित विश्वस्तरीय संस्थान के रूप में पहचान बना चुका है।

 

भाषा विभाग :

सुभारती विश्वविद्यालय केएक संबद्ध विभाग के रूप में वर्ष 2019 में भाषा विभाग की स्थापना की गई। विभाग ने तब से भाषाओं और साहित्य के अध्ययन, शिक्षण और अनुसंधान में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।विभाग का मार्गदर्शक सिद्धांत ऋग्वेद की ऋचा से प्रेरित है: "आ नो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वतः" जो समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप, विभाग वर्तमान में हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में स्नातक पाठ्यक्रम संचालित हैं तथा हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में परास्नातक एवं पीएचडी के साथ-साथ विद्यार्थियों की भाषाई क्षमता में वृद्धि हेतु फ्रेंच, कोरियन,हिंदी, संस्कृत एवं अंग्रेजी भाषाओं में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी संचालित किये जा रहे हैं I

 

मेरठ :

सन् 1857 की क्रांति के लिये भी प्रसिद्ध, मेरठ महानगर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर हैयह शहर क्रीड़ा वस्तुओं (विशेषकर क्रिकेट बैट) के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है अत: मेरठ को भारत की क्रीड़ा राजधानी भी कहा जाता है। यह भारत में संगीत वाद्ययंत्र का सबसे बड़ा उत्पादक है तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेशमें शिक्षा केंद्र के रूप में भी प्रतिष्ठित है। इस महानगर का अत्यंत प्राचीन एवं समृद्ध इतिहास है। यह शहर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के 70 किमी पूर्वोत्तर और राज्य राजधानी लखनऊ के 453 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है।

 

अखिल भारतीय राष्ट्रवादी लेखक संघ :

अखिल भारतीय राष्ट्रवादी लेखक संघ एक पंजीकृत न्यास है जिसके प्रमुख उद्देश्य में साहित्य , संस्कृतिक कला, इतिहास , शिक्षा दर्शन जीवन मूल्यों और एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से राष्ट्रवाद को संपोषित करना है। इस हेतु वैचारिक जागृति से साहित्यक, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए प्रति बद्ध संगठन है तथा इसके अपने सामाजिक सरोकार हैं। यही कारण है कि पिछले लगभग तीन वर्षों से यह नियमित ऑनलाइन पाक्षिक व्याख्यान एवं परिचर्चा आयोजित करता आ रहा है। अब तक जितने भी विद्वान व्याख्यान हेतु आमंत्रित किये गए हैं उनमें साहित्य, संस्कृति, संगीत इतिहास, पत्रकारिता, सिनेमा और कला जगत के स्वनाम धन्य विभूतियाँ हैं। व्याख्यान का संयोजन अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलसचिव और प्रख्यात स्तंभकार प्रो. (डॉ.) आनंद पाटिल द्वारा किया जाता है। अखिल भारतीय राष्ट्रवादी लेखक संघ का मुख्य उद्देश्य भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति, भाषा-साहित्य, कला और इतिहास के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ राष्ट्रवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाना है। इसके अंतर्गत साहित्यिक व सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं, विचार गोष्ठियों, परिचर्चाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों और विद्वानों को प्रोत्साहित कर उनका मार्गदर्शन एवं सम्मान करना है।